तुम सरहदों की रक्षा करते हो, हम गर्व कर लेते हैं
हर त्यौहार, घर-परिवार भूल कर,
कब किस गोली पर लिखा हो नाम तुम्हारा,
शहादत पर तुम्हारी हम परवाह करें ना करें, पर हम गर्व कर लेते हैं
संतुष्ट कर लेते हैं हम खुद को, जो दोगुने सैनिक दुश्मन के मारे जाए
शर्मिंदा हैं हम, कैसे जीवन की कीमत तुम्हारी कम कर देते हैं
कुछ और शायद कर नहीं सकते, इसलिए हम गर्व कर लेते हैं!


