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Friday, 14 August 2020

सैनिक


तुम कठिन अभ्यास करते हो, हम गर्व कर लेते हैं
तुम सरहदों की रक्षा करते हो, हम गर्व कर लेते हैं 
हर त्यौहार, घर-परिवार भूल कर, 
तुम प्रतिपल संघर्ष करते हो, हम गर्व कर लेते हैं 
कब किस गोली पर लिखा हो नाम तुम्हारा,
 तुम बिन परवाह किए, धुप, बारिश, तूफान में 
माँ भारत का सजदा करते हो, हम गर्व कर लेते हैं 


 

शहादत पर तुम्हारी हम परवाह करें ना करें, पर हम गर्व कर लेते हैं 
संतुष्ट कर लेते हैं हम खुद को, जो दोगुने सैनिक दुश्मन के मारे जाए 
शर्मिंदा हैं हम, कैसे जीवन की कीमत तुम्हारी कम कर देते हैं 
कुछ और शायद कर नहीं सकते, इसलिए हम गर्व कर लेते हैं!





Friday, 17 July 2020

याद भी बाक़ी नहीं!

याद भी बाक़ी नहीं
उस किरदार की जो बचपन में निभाया था
बेबाक़ कुछ भी कह जाती थी 
बेखौफ़ कुछ भी कर जाती थी 

फिर सलीका सिखाने को 
घरवालों ने बेड़ा उठाया


"लड़कियां ऐसे नहीं बोलतीं"
"वैसे नहीं बैठती"
"यहाँ नहीं जाती"
"रात बाहर नहीं रहती"

सीख लिए सब तौर तरीके 
और खो दिया वो किरदार 
जिसकी अब याद भी बाकी नहीं!




Wednesday, 15 July 2020

..है तो ज़िन्दगी ही




ज़िन्दगी के मायने अलग है 
पर है तो ज़िन्दगी ही.. तेरी भी मेरी भी

हर सुबह सवेरा नहीं होता मेरा 
पर रात तो होती है.. तेरी भी मेरी भी 

गुमनाम सही, पर आवारगी पालते है 
ख्वाहिशें कुछ तो रह जाती हैं.. तेरी भी मेरी भी 

मुख़्तसर सी मोहलत नहीं मिलती महलों में 
न मुसाफिर यहाँ थम पाता है 

उम्र जी लेते हैं उम्र भर 
ज़िन्दगी रह जाती है.. तेरी भी मेरी भी!