Friday, 17 July 2020

याद भी बाक़ी नहीं!

याद भी बाक़ी नहीं
उस किरदार की जो बचपन में निभाया था
बेबाक़ कुछ भी कह जाती थी 
बेखौफ़ कुछ भी कर जाती थी 

फिर सलीका सिखाने को 
घरवालों ने बेड़ा उठाया


"लड़कियां ऐसे नहीं बोलतीं"
"वैसे नहीं बैठती"
"यहाँ नहीं जाती"
"रात बाहर नहीं रहती"

सीख लिए सब तौर तरीके 
और खो दिया वो किरदार 
जिसकी अब याद भी बाकी नहीं!




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